देहरादून के रोचक तथ्य

देहरादून के रोचक तथ्य

हम सभी जानते हैं कि देहरादून उत्तराखंड की राजधानी है, इसे भारत का शिक्षा केंद्र माना जाता है इसके साथ ही ये कई प्रतिष्ठित संस्थाओ के लिए भी जाना जाता है जैसे भारतीय श्रमिक अकादमी, तेल एव प्र्कार्तिक गैस निगम लिमिटेड आदि. देहरादून को भारत के नामी शहरों में जाना जाता है ज्यादातर लोग देहरादून के पर्यावरण और धार्मिक स्थल से प्रभावित हो देहरादून घुमने जाया करते है लेकिन हममे से काफी कम लोगो को इस शहर के गौरवशील इतिहास के बारे में पता होगा. आज के इस पोस्ट के जरिये आप जानेगे देहरादून के कुछ रोचक तथ्य

देहरादून की स्थापना 18 वीं शताब्दी में एक सिख गुरु ( गुरु राम राय) ने की थी 

सिख भक्तों ने दून में 1675 में वापस आकर लगभग 24 वर्षों तक यहां शासन किया। 18 वीं शताब्दी  सातवें सिख गुरु, गुरु हर राय के बड़े पुत्र यहां आए जिनके द्वारा दून अस्तित्व में आया था। गुरू राम राय का सम्मान करने के लिए, धम्मवाला गांव प्रत्येक वर्ष एक मशहूर मेले का आयोजन करता है।


देहरादून शब्द का अर्थ

देहरादून को दो शब्दों ‘देहरा’ + दून से लिया गया है जिसका मतलब डेरा, गृह या घर है और ‘डून’ शब्द हिमालय और ‘शिवालिक’ के बीच स्थित एक घाटी के लिए है।

मौर्य द्वारा शासित,

273 ईसा पूर्व से 232 ईसा पूर्व महान अशोका के शासनकाल के तहत देहरादून मौर्य साम्राज्य का एक हिस्सा था। 1860 में कलसी में पाए जाने वाले महान अशोक के रॉक फिक्स्ड से यह बात सिद्ध होती है |  देहरादून का ‘स्कंद पुराण’ में भी उल्लेख मिलता है, ‘स्कंद पुराण’ में,  भगवान शिव के निवास केदार खंड के रूप में देहरादून का उल्लेख किया गया है, यह महाभारत में द्रोणागिरी के रूप में भी प्रकाशित किया गया है।

न सिर्फ ‘महाभारत’, ‘रामायण’ में देहरादून का भी उल्लेख है

लंका यात्रा से वापसी के दौरान लक्ष्मण के साथ भगवान राम ने देहरादून का दौरा  किया था। यह हमारे देश के महान गुरु, गुरु द्रोणाचार्य का घर भी है। गुरु द्रोणाचार्य को कौरव सेना के कमांडर-इन-चीफ के रूप में  देखा गया है | देहरादून में लक्ष्मण सिधा मंदिर के स्थान पर लक्ष्मण तपस्या करते थे यह प्राचीन मंदिर में आसानी से  पैरों से पहुंचा जा सकता है और यह मंदिर शहर के परिवेश में सुशोभित ह

 ‘भारत का शैक्षणिक केंद्र’

देहरादून में कई उच्च शैक्षणिक संस्थान हैं जैसे डून स्कूल, वेलहम गर्ल्स स्कूल, राष्ट्रीय भारतीय सैन्य महाविद्यालय, वन अनुसंधान संस्थान, भारतीय जीव विज्ञान सर्वेक्षण, वाडिया संस्थान हिमालयी जिओलॉजी और कई अन्य

60 के दशक में कैबरे शो


बॉम्बे और दिल्ली के अलावा, देहरादून एकमात्र ऐसा स्थान था जहां काबरे शो आयोजित किए गए थे |  जी हा, आपको ये जानकर हैरानी होगी की देहरादून में ६० के दशक में कैबरे शो आयोजित किए जगाये थे
हां, यह सच है! दून ने यह सब देखा है।

2000 वर्ष पुरानी मंदिरों और मूर्तियां

देहरादून शहर के क्षेत्रों में पाए गए ये मंदिर और मूर्तियां महाभारत और रामायण के महाकाय काल से जाने जाते हैं और इसलिए इसे 2000 वर्ष  पुराना माना जाता है

लीची की भूमि

देहरादून को लीची की भूमि के रूप में भी जाना जाता है. कहा जाता है देहरादून की लीची उत्तराखंड ही नही बल्कि पुरे भारत में प्रसिद्ध है